25 जून 2004, पुर्तगाल में चल रहे यूरो कप के क्वॉर्टर फाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन फ्रांस के सामने ग्रीस की टीम थी। एक से बढ़कर एक दिग्गजों से भरी फ्रेंच टीम के सामने ग्रीस की टीम वैसे ही खड़ी थी जैसे 1983 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में कपिल देव की अगुवाई वाली टीम इंडिया।
किसी को उम्मीद नहीं थी कि ग्रीस, फ्रांस को टक्कर दे पाएगी। तमाम फुटबॉल पंडित, जर्नलिस्ट, फैंस सब फ्रांस के अगले मैच की तैयारी में लगे थे, क्योंकि इस मैच में तो बस फ्रेंच टीम को 90 मिनट प्रैक्टिस करनी थी ना। वैसे अगर उस दौर में मैं फुटबॉल देखता तो मैं भी फ्रांस के पाले में ही खड़ा होता।
फ्रेंच टीम थी ही ऐसी- गोलकीपर फैबिएन बार्थेज, डिफेंस में लिलियन थुर्रम, माइकल सिल्वेस्टर और विलियम गलास जैसे दिग्गज। मिडफील्ड में पिछले यूरो के बेस्ट प्लेयर चुने गए और फुटबॉल की दुनिया के बेस्ट अटैकिंग मिडफील्डर्स में से एक ज़िनेदिन ज़िदान, फुटबॉल की हिस्ट्री के बेस्ट होल्डिंग मिडफील्डर्स में से एक क्लाउल माकेलेले, रॉबर्ट पाइरेस, अटैक में आर्सनल लेजेंड थिएरी ऑनरी, युवेंटस के दिग्गज डेविड ट्रेजेगुएट और यूनाइटेड लेजेंड लुईस साहा वाली टीम को कोई भी फुटबॉल फैन सपोर्ट कर देगा।
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में यह मैच शुरू तो हुआ फ्रांस के शोर के साथ लेकिन मिनट दर मिनट हवा ग्रीस की तरफ होती गई। अनजान प्लेयर्स वाली ग्रीस ने कमाल का खेल दिखाते हुए फ्रेंच टीम को बांधकर रख दिया था। दुनिया की बेस्ट अटैकिंग टीम्स में से एक फ्रांस के अटैकर्स ना तो मूव बना पा रहे थे और ना ही ग्रीस के डिफेंस पर कोई प्रेशर।
मैच पर ग्रीस की दमदार पकड़ से फ्रांस की झुंझलाहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे मैच में उन्होंने टार्गेट पर 4 जबकि टार्गेट के बाहर 6 शॉट्स मारे। ग्रीस ने इस मैच में कुल 5 शॉट लिए और पांचों ही गोल पर रहे।
मैच के 65वें मिनट में एंजेलोस चैरिस्टीज ने मैच का इकलौता गोल कर ग्रीस को फ्रांस पर इतिहास की पहली जीत दिलाई। इस हार के साथ ही डिफेंडिंग चैंपियन फ्रांस यूरो 2004 से बाहर हो गया और इस हार से बेजार ज़िदान ने इंटरनेशनल फुटबॉल को अलविदा कह दिया।
अगस्त 2005, साल 2006 के वर्ल्ड कप के क्वॉलिफायर्स मुकाबले चल रहे थे। फ्रांस की टीम अपने कई मुख्य खिलाड़ियों जैसे, माकेलेले, डेजाइली, थुर्रम की 'मास रिटायरमेंट' के बाद वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई करने में नाकाम होती दिख रही थी। उस वक्त के टीम के कोच हैरान-परेशान थे कि टीम क्वॉलिफाई ना कर पाई तो क्या होगा।
थक-हारकर उन्होंने 34 साल के ज़िदान से वापस आने की रिक्वेस्ट की। टीम को परेशान देख ज़िदान ने वापसी की बात मान ली और कोच रेमंड डोमेनेच ने उन्हें कैप्टन बना दिया। ज़िदान ने वापसी के बाद फ्रांस की गोल्डेन जेनरेशन के दो अन्य महत्वपूर्ण सदस्य, माकेलेले और थुर्रम को वापसी के लिए मनाया। इनकी वापसी के बाद टीम ने अपना प्रदर्शन सुधारकर 2006 के वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई किया।
नॉकआउट राउंड्स में स्पेन, ब्राजील और पुर्तगाल को हराकर फाइनल में पहुंची। लास्ट ग्रुप मैच से सस्पेंड रहने वाले ज़िदान ने राउंड ऑफ-16 में स्पेन के खिलाफ एक असिस्ट और एक गोल के साथ वापसी की और अपनी टीम का क्वॉर्टरफाइनल में पहुंचना सुनिश्चित किया।
क्वॉर्टरफाइनल में फ्रांस ने जबरदस्त खेल दिखाते हुए डिफेंडिंग ब्राजील को गोल पर महज एक शॉट पर रोक दिया। ज़िदान ने थिएरी हेनरी के गोल को असिस्ट कर फ्रांस को 1-0 की जीत दिलाई और मैन ऑफ द मैच बने। सेमीफाइनल में ज़िदान ने पेनल्टी पर गोल दागकर अपनी टीम को पुर्तगाल पर जीत दिलाकर फाइनल में पहुंचा दिया।
उस वर्ल्ड कप में ज़िदान की फॉर्म का यह हाल था कि फाइनल से पहले ही फीफा ने उन्हें टूर्नामेंट का बेस्ट प्लेयर चुन लिया। जिदान को इसके लिए गोल्डन बॉल मिली। ज़िदान ने पहले ही बता दिया था कि इस वर्ल्ड कप के बाद वह फुटबॉल से रिटायरमेंट ले लेंगे। फ्रांस के फाइनल में पहुंचने के बाद इटली को छोड़कर पूरी दुनिया जिजोऊ के नाम से फेमस ज़िदान को वर्ल्ड कप जीतते हुए देखना चाहती थी।
9 जुलाई 2006 को बर्लिन में खेले गए इस मैच की शुरुआत बेहतरीन हुई और ज़िदान ने 7वें मिनट में मार्को मैटराज्जी के फाउल पर मिली पेनल्टी को गोल में बदल अपनी टीम को लीड दिलाई। इस गोल के साथ ही ज़िदान दो वर्ल्ड कप फाइनल्स में गोल करने वाले सिर्फ चौथे प्लेयर बन गए।
मैटराज्जी ने अपनी गलती को 19वें मिनट में सुधारा और आंद्रे पिर्लो के कॉर्नर पर गोल कर स्कोर 1-1 किया। फुलटाइम और एक्स्ट्रा टाइम में भी स्कोर 1-1 ही रहा और इटैलियन गोलकीपर जानलुइजी बुफों ने इस दौरान ज़िदान के एक हेडर पर शानदार सेव कर अपनी टीम को बचाया।
मैच के एक्स्ट्रा टाइम में इस वर्ल्ड कप का हीरो एक झटके में विलेन बन गया। मैच का 110वां मिनट चल रहा था, दोनों टीमें 1-1 गोल की बराबरी पर थीं। इसी दौरान लोगों ने देखा की इटैलियन डिफेंडर मैटाराज्जी ने ज़िदान से कुछ कहा, दोनों के बीच थोड़ी बातचीत हुई और ज़िदान दौड़ते हुए आगे बढ़ गए।
मैटाराज्जी फिर भी नहीं रुके और लगातार कुछ बोलते रहे। वो बोलते हुए चल रहे थे कि तभी दौड़ते हुए ज़िदान रुके, पलटे और अपना सर मैटाराज्जी की छाती पर दे मारा। मैटाराज्जी जमीन पर गिर पड़े और रेफरी का ध्यान दूसरी तरफ होने के नाते उसे पता ही नहीं चला कि हुआ क्या।
फोर्थ ऑफिशियल ने रेफरी को इस 'हेडबट' के बारे में बताया जिसके बाद रेफरी होरासियो इलिजोंडो ने टूर्नामेंट के बेस्ट प्लेयर को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया। यह ज़िदान के करियर का कुल 14वां और वर्ल्ड कप का दूसरा रेड कार्ड था। ज़िदान वर्ल्ड कप की हिस्ट्री में फाइनल मैच में रेड कार्ड पाने वाले कुल चौथे प्लेयर भी थे।
ज़िदान ने यह हरकत क्यों की इस पर कई तरह की बातें हुईं, अखबारों का दावा था कि मैटाराज्जी ने ज़िदान को मां-बहन की गालियां दी। मैटाराज्जी ने इस घटना से उबरने के बाद दावा किया कि उन्होंने ज़िदान से बदतमीजी जरूर की थी लेकिन मां की गालियां नहीं दी।
मैटाराज्जी ने ऐसा दावा करने वाले तीन ब्रिटिश अखबारों द टाइम्स, द सन और डेली स्टार पर केस भी किया था जिसका फैसला उनके पक्ष में रहा।
ज़िदान ने इस घटना पर माफी मांगने से इनकार कर दिया और देश के राष्ट्रपति जैक्स चिराक ने ज़िदान को 'Man Of Heart and Conviction' करार दिया। चिराक ने कहा कि उन्हें पता है कि जिजोऊ की यह हरकत अस्वीकार्य है लेकिन वह समझ सकते हैं कि उन्हें यह करने के लिए मजबूर किया गया था।
फीफा ने इस हरकत के लिए ज़िदान पर तीन मैच का बैन और 7,500 स्विस फ्रैंक का जुर्माना लगाया जबकि मैटाराज्जी पर 2 मैच का बैन और 5,000 स्विस फ्रैंक का जुर्माना लगाया था। चूंकि ज़िदान फुटबॉल से रिटायर हो चुके थे इसलिए उन्होंने बैन की जगह 3 दिन की सामुदायिक सेवा की।
ज़िदान ने बाद में अपनी हरकत के लिए माफी तो मांग ली लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें उसका कोई पछतावा नहीं है।
मैटाराज्जी ने इस घटना के 2 महीने बाद इसका विवरण कुछ इस तरह दिया, 'मैंने ज़िदान की शर्ट पकड़ी तो उसने मुझसे कहा कि अगर मुझे उसकी शर्ट चाहिए तो मैं मैच के बाद ले सकता हूं। जवाब में मैंने कहा कि इसकी जगह मैं तेरी वेश्या बहन को पसंद करूंगा।'
मैटाराज्जी ने दावा किया कि वह नहीं जानते थे कि ज़िदान की कोई बहन भी है। खैर, ज़िदान का हेडबट इटली के बजाय फ्रांस पर भारी पड़ा और पेनल्टी शूटआउट तक खिंचे इस मैच में इटली ने फ्रांस को 5-3 से हराकर वर्ल्ड कप जीत लिया।
इस तरह दुनिया के महानतम फुटबॉलर्स में से एक का करियर एक रेड कार्ड और भारी विवाद के साथ खत्म हुआ। हालांकि फ्रांस की जनता ने अपने नायक ज़िदान और अपनी टीम का जोरदार स्वागत किया और राजधानी पेरिस के क्रिलोन होटल पर बड़ी सी जर्सी टांग हजारों लोग अपने नायकों के अभिवादन के लिए मौजूद थे।
जिजोऊ, जिजोऊ चिल्ला रही इस भीड़ का नेतृत्व देश के राष्ट्रपति कर रहे थे। इस घटना को लेकर कराई गई वोटिंग में 61 फीसदी फ्रेंच लोगों ने कहा कि उन्होंने ज़िदान को माफ कर दिया है जबकि 52 फीसदी लोगों का कहना था कि वह ज़िदान की हालत समझ सकते हैं।
अखबार ज़िदान की तारीफों से भरे थे। एक अखबार की हेडिंग थी, 'पूरे एक महीने तक फ्रांस ज़िदान के साथ सपने देख रहा था' तो वहीं दूसरे अखबार ने लिखा, 'हमारे लिए खुशी की बात है कि हमारा हीरो अविश्वसनीय है'
अभी ज़िदान रियल मैड्रिड के मैनेजर हैं और 18 महीनों के कार्यकाल में यूरोपियन क्लब कंपटिशन की सबसे बड़ी ट्रॉफी चैंपियंस लीग को दो बार जीत चुके हैं जबकि मार्को मैटाराज्जी पिछले सीजन तक इंडियन सुपर लीग की टीम चेन्नैइन FC के मैनेजर थे जिसके साथ उन्होंने लीग का दूसरा सीजन जीता था।
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