Thursday, 13 September 2018

अपने पैरों पर बॉल लेकर पैदा होने वाला याज़िद

15 मई 2002, वेल्स के ग्लासगो शहर का हैंपडेन पार्क स्टेडियम। 50, 449 लोगों से भरे हुए इस स्टेडियम की पिच पर यूरोप की सबसे बड़ी क्लब प्रतियोगिता चैंपियंस लीग का फाइनल खेला जा रहा था। जर्मन टीम बेयर लेवरकुसेन के सामने थी ग्लैक्टिकोज से भरी हुई रियल मैड्रिड की टीम।

सर एलेक्स फर्ग्युसेन की मैनचेस्टर यूनाइटेड को अवे गोल के आधार पर हराकर फाइनल में पहुंची लेवरकुसेन के हौंसले बुलंद थे। दूसरी तरफ रियल मैड्रिड की टीम घरेलू प्रतिद्वंद्वी बार्सिलोना को 3-1 से हराकर फाइनल में आई थी।

इसी साल युवेंटस से आए अटैकिंग मिडफील्डर ज़िनेदिन ज़िदान, इतिहास के बेस्ट होल्डिंग मिडफील्डर्स में से एक क्लाउडे माकेलेले के साथ लुइस फिगो, राउल जैसे प्लेयर्स वाली रियल उस जमाने की सबसे दमदार टीम्स में से एक थी।

मैच के आठवें मिनट में राउल ने गोल कर रियल मैड्रिड को 1-0 की लीड दिलाई। इसके 5 मिनट बाद ही लेवरकुसेन के डिफेंडर लूसियो ने स्कोर 1-1 से बराबर कर लिया। जल्दी-जल्दी दो गोल होने के बाद दोनों ही टीम्स मिले मौकों को भुना नहीं पा रही थी।

मैच का पहला हाफ खत्म होने वाला था कि कुछ ऐसा हुआ जो 23 जून 1972 को फ्रांस के मार्सेय शहर में रह रहे अल्जीरियन रेफ्यूजी इस्माइल और मलिका के घर पैदा हुए सबसे छोटे बच्चे याज़िद को अमर कर गया।

दिन में गोदामों में मजदूरी और रात में डिपार्टमेंटल स्टोर के बाहर चौकीदारी करने वाले इस्माइल बड़ी मुश्किल से अपने पांच बच्चों का ख्याल रख पाते थे। हालांकि अपने हाई क्राइम रेट और बेरोजगारी के लिए मशहूर इस इलाके में उनका परिवार बाकी कई परिवारों से ठीकठाक हालत में था।

यहां से निकला याज़िद यूरोपियन फुटबॉल में अमर होने जा रहा था। उस रात याज़िद ने क्लब फुटबॉल की दुनिया की सबसे एलीट प्रतियोगिता के फाइनल में जो गोल किया उसे आज भी इस प्रतियोगिता का बेस्ट गोल माना जाता है। (2016-17 सीजन में युवेंटस के मारियो मंजुकिच ने रियल मैड्रिड के खिलाफ इसी टक्कर का एक गोल किया था)

मैच का 45वां मिनट चल रहा था, हाफटाइम की सीटी बजने वाली थी। रियल मैड्रिड के लेफ्ट बैक रॉबर्टो कार्लोस बॉल लेकर आगे बढ़े और उन्होंने उसे मिडफील्डर सैंटियागो सोलारी की तरफ धकेल दिया। सोलारी को बॉल देकर कार्लोस ने अपनी स्पीड बढ़ाई और लेवरकुसेन के बॉक्स की तरफ लपके।

लेवरकुसेन के डिफेंडर उनके साथ-साथ ही भाग रहे थे लेकिन कार्लोस की स्पीड उनसे तेज थी और वह सोलारी द्वारा उछाली गई बॉल तक लेवरकुसेन के डिफेंडर से पहले पहुंच गए। कार्लोस बॉल तक तो पहुंच गए लेकिन उनके पास उसे कंट्रोल करने का जरा भी मौका नहीं था। कार्लोस ने लगभग भागते-भागते ही बॉल को अपनी टांग से लेवकुसेन के बॉक्स में उछाल दिया।

उस वक्त रियल मैड्रिड के तीन प्लेयर लेवरकुसेन के बॉक्स में थे। डी के करीब दो डिफेंडर्स के साथ चिपककर खड़े थे राउल और टीम के दूसरे स्ट्राइकर फर्नांडो मोरीन्टेस। इनकी निगाह बराबर बॉल पर थी और बॉल डी से थोड़ा दूर और बॉक्स में अनमार्क खड़े ज़िनेदिन याज़िद ज़िदान की तरफ बढ़ी।

ज़िदान मुख्यतः अपने दाहिने पैर का इस्तेमाल करने के लिए मशहूर हैं और उनका लेफ्ट फुट वीक माना जाता है। बॉल ज़िदान की तरफ बढ़ी और उन्होंने बॉल को जमीन से कुछ फीट ऊपर ही रखते हुए अपने बांए पैर को तलवार की तरह घुमाया और अगले ही पल बॉल गोल के अंदर थी।

इस गोल ने भले ही ज़िदान को फुटबॉल में अमर कर दिया लेकिन उनका यहां तक का सफर इतना आसान नहीं था।ज़िदान जब पांच साल के थे तो खाली वक्त में कॉलोनी के 80*12 साइज के प्लाजा में बच्चों को फुटबॉल खेलते देखकर वह भी फुटबॉल खेलने लगे थे।
पांच साल बाद उन्हें अपना पहला प्लेयर्स लाइसेंस मिला जब ज़िदान ने एक लोकल क्लब की जूनियर टीम जॉइन की।

ज़िदान को 14 साल की उम्र में बड़ा ब्रेक मिला जब AS कांस के स्काउट जीन वराउड ने उसका खेल देखकर क्लब को उसे ट्राई करने की सलाह दी। 6 दिन के लिए कांस आए ज़िदान पूरे 4 साल बाद क्लब से निकले।

क्लब में अपने टाइम के दौरान ज़िदान को गुस्सा बहुत आता था और अक्सर उसे सज़ा के तौर पर सफाई करनी पड़ती थी।

अपने परिवार या ओरिजिन का मज़ाक बनाने वालों को पीट देना ज़िदान के लिए लगभग रोज की बात थी। उनके शुरुआती कुछ हफ्ते तो सिर्फ सफाई करने में बीते क्योंकि उन्होंने अपने ओरिजिन का मजाक उड़ाने वाले एक विपक्षी प्लेयर को मैदान पर ही धो दिया था।

18 मई 1989 को कांस के लिए डेब्यू करने वाले ज़िदान ने 10 फरवरी 1991 को क्लब के लिए पहला गोल किया जिसके लिए क्लब के चेयरमैन ने उसे एक कार गिफ्ट की। 1992-93 सीजन में ज़िदान बोर्डाओ आ गए जहां उन्होंने कमाल का प्रदर्शन कर पूरी दुनिया के बड़े क्लब्स का ध्यान अपनी तरफ खींचा।

1996 में ज़िदान इटैलियन चैंपियन युवेंटस आए जहां उन्होंने कई टाइटल्स जीते। हालांकि ज़िदान का गुस्सा अभी भी वैसा ही था और चैंपियंस लीग के एक गेम में हैमबर्गर SV के प्लेयर जोकेन कींज को अपने सर से ठोकर मारने के चलते उनपर पर कुछ मैचों का बैन लगा दिया गया। युवेंटस के साथ फीफा वर्ल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर और बैलन डे ऑर जैसे अवॉर्ड्स जीतने के बाद ज़िदान रियल मैड्रिड आ गए।

फुटबॉल की दुनिया में चुपचाप एंट्री कर धमाकेदार नाम बनाने वाले ज़िदान की फुटबॉल से विदाई बहुत अच्छी नहीं रही। ज़िदान ने इटली के खिलाफ 2006 वर्ल्ड कप के फाइनल में मार्को मैट्टराजी को हेडबट कर रेड कार्ड खाकर अपने चमकदार करियर का बुरा अंत किया।

हाल ही में ज़िदान ने रियल मैड्रिड के मैनेजर की पोस्ट से इस्तीफा दिया है जहां उन्होंने लगभग तीन सीजन्स में क्लब को 3 चैंपियंस लीग के साथ ही तमाम अन्य ट्रॉफियां भी जिताई थीं।

ब जाते-जाते आपको ज़िदान के बारे में कई फेमस कोट्स में से अपना फेवरेट कोट पढ़ाना चाहूंगा - 'मुझे लगता है कि वह अपने पैरों पर फुटबॉल लेकर पैदा हुआ था। मुझे लगता है कि डॉक्टर ने उसे निकालते ही बोला होगा, ओह यह थोड़ा अजीब है लेकिन यहां एक फुटबॉल है।' - इमैनुएल पेटिट, चेल्सी, आर्सनल और फ्रेंच लेजेंड

No comments:

Post a Comment