कल्पना करिए कि आप एक खिलाड़ी हैं, किसी टीम गेम में अपने देश के कप्तान। आप वर्ल्ड कप में हैं और चार घंटे बाद आपको अपना सबसे जरूरी ग्रुप मैच खेलना है। इस मैच में हार आपको वर्ल्ड कप से बाहर कर देगी यानि कि आज ना जीते तो सारी मेहनत बर्बाद हो जाएगी। ऐसे में आपके पास एक फोन आता है जिसमें बताया जाता है कि जहां आप हैं वहां से हजारों मील दूर आपके पिता को किडनैप कर लिया गया है और अगर आपने किसी को बताया तो उन्हें जान से मार देंगे।
ऐसे पल व्यक्ति की परीक्षा लेते हैं, समझ नहीं आता कि क्या करें... जिस सपने को लेकर घर से इतनी दूर आए उसके लिए लड़ें या जिसने पैदा किया, यहां तक आने लायक बनाया उसके लिए ये सब छोड़कर दौड़ पड़ें।
ऐसे पलों में इंसान दिग्भ्रमित हो जाता है और अक्सर हड़बड़ी में कुछ गलत कर बैठता है लेकिन रूस में चल रहे वर्ल्ड कप में एक प्लेयर ने इस कठिन परिस्थिति में भी खुद को संभाला और अपने देश के लिए जी-जान लगाकर लड़ा। ये बात और है कि उसकी टीम हार गई लेकिन उसने अपनी व्यक्तिगत परेशानी के चलते देश को झुकने नहीं दिया।
ये सच्ची घटना घटी नाइजीरिया और अर्जेंटीना के बीच हुए करो या मरो वाले ग्रुप स्टेज में जब मैच से सिर्फ चार घंटे पहले नाइजीरिया के कैप्टन जॉन ओबी मिकेल को फोन कर बताया गया कि उनके पिता को किडनैप कर लिया गया है और किडनैपर्स ने 10 मिलियन नाइजीरियन नाइरा ( 28,000 अमेरिकी डॉलर) की फिरौती मांगी है।
पुलिस प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा, 'किडनैपर्स ने फिरौती के रूप में 10 मिलियन नाइजीरियन नाइरा की मांग की थी लेकिन पुलिस ने इंटेलिजेंस की मदद से उन पर धावा बोल दिया। इस प्रोसेस में पुलिस और किडनैपर्स के बीच फायरिंग भी हुई जिसके बाद किडनैपर्स मिकेल के पिता और ड्राइवर को छोड़कर जंगलों में भाग गए।'
गौरतलब है कि मिकेल के पिता इससे पहले भी 2011 में किडनैप हो चुके हैं जहां उन्हें 10 दिन बाद रिहा कर दिया गया था। पुलिस का कहना है कि अब वे मिकेल के परिवार की सुरक्षा और मजबूत करेंगे।


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