अगर आपको इतिहास, क्राइम, ड्रग्स के बारे में पढ़ना-सुनना-देखना अच्छा लगता है। आपके पास इंटरनेट है और आपको इंटरनेट पर समय बिताना अच्छा लगता है। आपके यार-दोस्तों के पास नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन या टोरेंट की अवेलिबिलिटी है तो आपने पिछले ढाई सालों में कम से कम एक बार जरूर- पाब्लो एमीलियो एस्कोबार गवीरिया के बारे में सुना होगा।
जी हां, वही पाब्लो जिसने पूरे कोलंबिया को लगभग बंधक बना लिया था और जिसके पास इतने पैसे थे कि उसे खेतों और फॉर्म हाउसेज में दफनाकर रखने पड़ते थे। जो अपने सिकारियो (किलर्स) को पुलिसवालों की हत्या करने पर लाखों का ईनाम देता था।
तस्वीरः पाब्लो एस्कोबार एक फुटबॉल मैच के बीच (दीजफुटबॉलटाइम्स)
वही पाब्लो जिसने हजारों लोगों की हत्या करवा दी और अरबों टन ड्रग्स से अमेरिका और पूरी दुनिया की ऐसी की तैसी कर दी। इतने खूंखार, दुर्दांत अपराधी को साल 1992 में मार दिया गया था, लेकिन अगर हम आपसे कहें कि साल 1994 में कुछ लोग ऐसे थे जिन्हें पाब्लो के मरने का अफसोस था।
ऐसे लोग हजारों की संख्या में थे जो कह रहे थे कि काश आज पाब्लो जिंदा होता। कोलंबिया और दुनिया के सबसे खतरनाक अपराधी को जिंदा देखने के पीछे लोगों का अपना स्वार्थ था। दरअसल उन्हें लगता था कि अगर पाब्लो एस्कोबार जिंदा होता तो आंद्रेस एस्कोबार की मौत ना हुई होती। अब आप सोच रहे होंगे कि ये आंद्रेस एस्कोबार कौन है और इसके जिंदा रहने में पाब्लो एस्कोबार का क्या रोल होता।
तो चलिए आपको ले चलते हैं आज से 24 साल पहले...
1 जुलाई 1994 की एक खूबसूरत शाम थी। कभी पाब्लो एस्कोबार का इलाका रहे मेडेइन के एल पाब्लादो इलाके में हाल ही में अमेरिका में हुए वर्ल्ड कप में खेलकर लौटा आंद्रेस एस्कोबार अपने फ्रेंड्स के साथ एक बार में पार्टी कर रहा था। वहां थोड़ा वक्त बिताने के बाद आंद्रेस अपने साथियों के साथ एक शराब की दुकान में गया और वहां उन्होंने शराब खरीदी।
इसके थोड़ी देर बाद वे सब एल इंडिओ नाइटक्लब में गए। वहां पार्टी करने के बाद सारे साथी एक-एक कर वहां से निकल गए। आंद्रेस वहीं रुका रहा और सुबह 3 बजे के करीब वह एल इंडिओ की पार्किंग में अपनी कार में अकेला था जब तीन लोग उसके पास पहुंचे। उन्होंने वहां पहुंचते ही उसके साथ बहस शुरू कर दी।
बहस के बीच ही तीन में से दो लोगों ने हैंडगन निकल ली। आंद्रेस को पॉइंट 38 कैलिबर की पिस्टल से 6 गोलियां मारी गईं। बाद में दावा किया गया कि गोली मारने वाला बंदा हर गोली के बाद जोर से चिल्लाया था- गोल! कातिल ने उतनी बार गोलियां मारीं और 'गोल' चिल्लाया जितनी बार 22 जून 1994 को 'उस गोल' के बाद साउथ अमेरिकी कॉमेंट्रेटर ने कहा था- गोल!
गोलियां मारने के बाद तीनों ही टोयोटा पिकअप ट्रक में बैठकर निकल गए और आंद्रेस वहीं पड़ा रहा.. अपने बहते खून से सना.. बिना किसी मदद के। कुछ देर बाद लोगों को पता चला तो वे उसे लेकर अस्पताल भागे जहां 45 मिनट बाद उस आंद्रेस एस्कोबार की मौत हो गई।
द जेंटलमेन के नाम से फेमस आंद्रेस एस्कोबार की अंतिम यात्रा में 120,000 लोग जमा हुए। इस अंतिम यात्रा में आए या फिर ना आ पाए, हर कोलंबियन का यही कहना था कि, 'काश पाब्लो एस्कोबार जिंदा होता।' दरअसल पाब्लो कोलंबियन नेशनल फुटबॉल टीम का जबरा फैन था और लोगों को लगता था कि उसके जिंदा रहते किसी की हिम्मत नहीं होती कि नेशनल टीम के किसी प्लेयर को हाथ भी लगा दे।

अब आप सोच रहे होंगे कि 'उस गोल' का क्या किस्सा है जिसके चलते वर्ल्ड कप में अपने देश का प्रतिनिधित्व कर चुके किसी फुटबॉलर को चंद दिनों बाद उसके ही देशवासियों ने मार दिया। तो चलिए आपको बताते हैं उस गोल की कहानी।
अमेरिका में हुए 1994 के वर्ल्ड कप में कोलंबिया अपना पहला ग्रुप मैच हार चुका था। 22 जून 1994 को दूसरे ग्रुप मैच में कोलंबिया के सामने थे होस्ट्स- यूनाइटेड स्टेट्स। 93 हजार से ज्यादा लोगों से भरे स्टेडियम में कोलंबिया की टीम अच्छा खेल रही थी लेकिन मैच के 35वें मिनट में अमेरिकी मिडफील्डर जॉन हार्क्स ने अपने साथी प्लेयर अर्नी स्टीवार्ट की तरफ एक लो क्रॉस खेला जिसे क्लियर करने के चक्कर में कोलंबियन डिफेंडर आंद्रेस एस्कोबार (द जेंटलमैन) बॉल को अपने ही जाल में उलझा बैठे।
इस गोल ने कोलंबियन फैंस को निराश करने साथ ही टीम की लय भी भटका दी और 90वें मिनट में सब्सिट्यूट अडोल्फो वलेंसिया के गोल करने से पहले कोलंबियन टीम 2-0 से पीछे थी। वलेंसिया का यह गोल सांत्वना गोल साबित हुआ और कोलंबिया ने मैच 2-1 से गंवा दिया।
इस हार ने कोलंबियन फैंस का दिल और ड्रग लॉर्ड सैंटियागो गलान का बैंक बैलेंस तोड़ डाला था। फैंस ने तो अपने गुस्से पर काबू कर लिया लेकिन गलान को सट्टेबाजी मे मिली इतनी बड़ी हार बर्दाश्त नहीं हुई और (ऐसा कहते हैं) एस्कोबार को मार दिया।
एस्कोबार की हत्या के दूसरे दिन यानि कि 2 जुलाई 1994 की रात को कोलंबियन ड्रग कार्टेल के बॉडीगार्ड्स में से एक हम्बर्टो कास्त्रो मुनोज़ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मुनोज़ ने अगले दिन एस्कोबार की हत्या का अपराध कबूल लिया। मुनोज़ गलान के ड्राइवर के रूप में भी काम करता था।
मुनोज को जून 1995 में एस्कोबार की हत्या का दोषी माना गया और कोर्ट ने उसे 43 साल के लिए जेल भेज दिया। 2001 में उसकी अपील के बाद सजा घटाकर 26 साल कर दी गई और लगभग अच्छे व्यवहार को देखते हुए 11 साल की सजा काटने के बाद मुनोज़ को साल 2005 में रिहा कर दिया गया।
साल 2009-10 में आई ESPN की एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज 30 For 30 में ESPN ने 'टू एस्कोबार्स' ब्रॉडकास्ट किया जिसमें इसके डायरेक्टर्स जेफ और माइकल ज़िम्बालिस्ट ने उस दौर में कोलंबिया के वर्ल्ड कप रन और एसोसिएशन फुटबॉल और देश के क्रिमिनल गैंग्स के बीच के रिश्ते पर पड़ताल की थी।
इसमें ज्यादा ध्यान मेडेइन कार्टेल पर था जिसे पाब्लो एस्कोबार चलाता था (पाब्लो का आंद्रेस से कोई रिश्ता नहीं था)। इस प्रोग्राम में कहा गया था कि अगर पाब्लो उस वक्त तक जिंदा होता तो गलान ब्रदर्स ने आंद्रेस को निशाना नहीं बनाया होता क्योंकि सभी जानते थे कि पाब्लो एस्कोबार कोलंबियन नेशनल टीम का बहुत बड़ा फैन था।
13 मार्च को आंद्रेस एस्कोबार का जन्मदिन होता है। फैंस आज भी उन्हें नहीं भूले हैं, खासतौर से एटलेटिको नैसिओनल (वह क्लब जिसके लिए एस्कोबार आखिरी बार खेले थे और जिसके बारे में कहा जाता है कि एक दौर में यह पाब्लो एस्कोबार का क्लब था।) के फैंस। उन्हें आंद्रेस के क्लीन टैकल्स के साथ एक और बात याद रहती है, वो लाइन जो आंद्रेस अक्सर कहते थे- 'जिंदगी यहां खत्म नहीं होती।'
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