Sunday, 30 September 2018

'तेरी शर्ट की जगह मैं तेरी वेश्या बहन को पसंद करूंगा' के बाद वह रुका, पलटा और धड़ाम

25 जून 2004, पुर्तगाल में चल रहे यूरो कप के क्वॉर्टर फाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन फ्रांस के सामने ग्रीस की टीम थी। एक से बढ़कर एक दिग्गजों से भरी फ्रेंच टीम के सामने ग्रीस की टीम वैसे ही खड़ी थी जैसे 1983 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में कपिल देव की अगुवाई वाली टीम इंडिया।

किसी को उम्मीद नहीं थी कि ग्रीस, फ्रांस को टक्कर दे पाएगी। तमाम फुटबॉल पंडित, जर्नलिस्ट, फैंस सब फ्रांस के अगले मैच की तैयारी में लगे थे, क्योंकि इस मैच में तो बस फ्रेंच टीम को 90 मिनट प्रैक्टिस करनी थी ना। वैसे अगर उस दौर में मैं फुटबॉल देखता तो मैं भी फ्रांस के पाले में ही खड़ा होता।

French midfielder Zinedine Zidane (3rd R

फ्रेंच टीम थी ही ऐसी- गोलकीपर फैबिएन बार्थेज, डिफेंस में लिलियन थुर्रम, माइकल सिल्वेस्टर और विलियम गलास जैसे दिग्गज। मिडफील्ड में पिछले यूरो के बेस्ट प्लेयर चुने गए और फुटबॉल की दुनिया के बेस्ट अटैकिंग मिडफील्डर्स में से एक ज़िनेदिन ज़िदान, फुटबॉल की हिस्ट्री के बेस्ट होल्डिंग मिडफील्डर्स में से एक क्लाउल माकेलेले, रॉबर्ट पाइरेस, अटैक में आर्सनल लेजेंड थिएरी ऑनरी, युवेंटस के दिग्गज डेविड ट्रेजेगुएट और यूनाइटेड लेजेंड लुईस साहा वाली टीम को कोई भी फुटबॉल फैन सपोर्ट कर देगा।

Fussball: EM 2004 in Portugal, FRA-GRE

पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में यह मैच शुरू तो हुआ फ्रांस के शोर के साथ लेकिन मिनट दर मिनट हवा ग्रीस की तरफ होती गई। अनजान प्लेयर्स वाली ग्रीस ने कमाल का खेल दिखाते हुए फ्रेंच टीम को बांधकर रख दिया था। दुनिया की बेस्ट अटैकिंग टीम्स में से एक फ्रांस के अटैकर्स ना तो मूव बना पा रहे थे और ना ही ग्रीस के डिफेंस पर कोई प्रेशर।

मैच पर ग्रीस की दमदार पकड़ से फ्रांस की झुंझलाहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे मैच में उन्होंने टार्गेट पर 4 जबकि टार्गेट के बाहर 6 शॉट्स मारे। ग्रीस ने इस मैच में कुल 5 शॉट लिए और पांचों ही गोल पर रहे।

Euro 2004: France v Greece

मैच के 65वें मिनट में एंजेलोस चैरिस्टीज ने मैच का इकलौता गोल कर ग्रीस को फ्रांस पर इतिहास की पहली जीत दिलाई। इस हार के साथ ही डिफेंडिंग चैंपियन फ्रांस यूरो 2004 से बाहर हो गया और इस हार से बेजार ज़िदान ने इंटरनेशनल फुटबॉल को अलविदा कह दिया।

अगस्त 2005, साल 2006 के वर्ल्ड कप के क्वॉलिफायर्स मुकाबले चल रहे थे। फ्रांस की टीम अपने कई मुख्य खिलाड़ियों जैसे, माकेलेले, डेजाइली, थुर्रम की 'मास रिटायरमेंट' के बाद वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई करने में नाकाम होती दिख रही थी। उस वक्त के टीम के कोच हैरान-परेशान थे कि टीम क्वॉलिफाई ना कर पाई तो क्या होगा।

Fussball: EM 2004 in Portugal, FRA-GRE

थक-हारकर उन्होंने 34 साल के ज़िदान से वापस आने की रिक्वेस्ट की। टीम को परेशान देख ज़िदान ने वापसी की बात मान ली और कोच रेमंड डोमेनेच ने उन्हें कैप्टन बना दिया। ज़िदान ने वापसी के बाद फ्रांस की गोल्डेन जेनरेशन के दो अन्य महत्वपूर्ण सदस्य, माकेलेले और थुर्रम को वापसी के लिए मनाया। इनकी वापसी के बाद टीम ने अपना प्रदर्शन सुधारकर 2006 के वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई किया।

नॉकआउट राउंड्स में स्पेन, ब्राजील और पुर्तगाल को हराकर फाइनल में पहुंची। लास्ट ग्रुप मैच से सस्पेंड रहने वाले ज़िदान ने राउंड ऑफ-16 में स्पेन के खिलाफ एक असिस्ट और एक गोल के साथ वापसी की और अपनी टीम का क्वॉर्टरफाइनल में पहुंचना सुनिश्चित किया।

French midfielder Zinedine Zidane (front

क्वॉर्टरफाइनल में फ्रांस ने जबरदस्त खेल दिखाते हुए डिफेंडिंग ब्राजील को गोल पर महज एक शॉट पर रोक दिया। ज़िदान ने थिएरी हेनरी के गोल को असिस्ट कर फ्रांस को 1-0 की जीत दिलाई और मैन ऑफ द मैच बने। सेमीफाइनल में ज़िदान ने पेनल्टी पर गोल दागकर अपनी टीम को पुर्तगाल पर जीत दिलाकर फाइनल में पहुंचा दिया।

उस वर्ल्ड कप में ज़िदान की फॉर्म का यह हाल था कि फाइनल से पहले ही फीफा ने उन्हें टूर्नामेंट का बेस्ट प्लेयर चुन लिया। जिदान को इसके लिए गोल्डन बॉल मिली। ज़िदान ने पहले ही बता दिया था कि इस वर्ल्ड कप के बाद वह फुटबॉल से रिटायरमेंट ले लेंगे। फ्रांस के फाइनल में पहुंचने के बाद इटली को छोड़कर पूरी दुनिया जिजोऊ के नाम से फेमस ज़िदान को वर्ल्ड कप जीतते हुए देखना चाहती थी।

French midfielder Zinedine Zidane (C) wa

9 जुलाई 2006 को बर्लिन में खेले गए इस मैच की शुरुआत बेहतरीन हुई और ज़िदान ने 7वें मिनट में मार्को मैटराज्जी के फाउल पर मिली पेनल्टी को गोल में बदल अपनी टीम को लीड दिलाई। इस गोल के साथ ही ज़िदान दो वर्ल्ड कप फाइनल्स में गोल करने वाले सिर्फ चौथे प्लेयर बन गए।

मैटराज्जी ने अपनी गलती को 19वें मिनट में सुधारा और आंद्रे पिर्लो के कॉर्नर पर गोल कर स्कोर 1-1 किया। फुलटाइम और एक्स्ट्रा टाइम में भी स्कोर 1-1 ही रहा और इटैलियन गोलकीपर जानलुइजी बुफों ने इस दौरान ज़िदान के एक हेडर पर शानदार सेव कर अपनी टीम को बचाया।

मैच के एक्स्ट्रा टाइम में इस वर्ल्ड कप का हीरो एक झटके में विलेन बन गया। मैच का 110वां मिनट चल रहा था, दोनों टीमें 1-1 गोल की बराबरी पर थीं। इसी दौरान लोगों ने देखा की इटैलियन डिफेंडर मैटाराज्जी ने ज़िदान से कुछ कहा, दोनों के बीच थोड़ी बातचीत हुई और ज़िदान दौड़ते हुए आगे बढ़ गए।

Argentine referee Horacio Elizondo shows


मैटाराज्जी फिर भी नहीं रुके और लगातार कुछ बोलते रहे। वो बोलते हुए चल रहे थे कि तभी दौड़ते हुए ज़िदान रुके, पलटे और अपना सर मैटाराज्जी की छाती पर दे मारा। मैटाराज्जी जमीन पर गिर पड़े और रेफरी का ध्यान दूसरी तरफ होने के नाते उसे पता ही नहीं चला कि हुआ क्या।

फोर्थ ऑफिशियल ने रेफरी को इस 'हेडबट' के बारे में बताया जिसके बाद रेफरी होरासियो इलिजोंडो ने टूर्नामेंट के बेस्ट प्लेयर को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया। यह ज़िदान के करियर का कुल 14वां और वर्ल्ड कप का दूसरा रेड कार्ड था। ज़िदान वर्ल्ड कप की हिस्ट्री में फाइनल मैच में रेड कार्ड पाने वाले कुल चौथे प्लेयर भी थे।

ज़िदान ने यह हरकत क्यों की इस पर कई तरह की बातें हुईं, अखबारों का दावा था कि मैटाराज्जी ने ज़िदान को मां-बहन की गालियां दी। मैटाराज्जी ने इस घटना से उबरने के बाद दावा किया कि उन्होंने ज़िदान से बदतमीजी जरूर की थी लेकिन मां की गालियां नहीं दी।

मैटाराज्जी ने ऐसा दावा करने वाले तीन ब्रिटिश अखबारों द टाइम्स, द सन और डेली स्टार पर केस भी किया था जिसका फैसला उनके पक्ष में रहा।

A photo taken 09 July 2006 shows French

ज़िदान ने इस घटना पर माफी मांगने से इनकार कर दिया और देश के राष्ट्रपति जैक्स चिराक ने ज़िदान को 'Man Of Heart and Conviction' करार दिया। चिराक ने कहा कि उन्हें पता है कि जिजोऊ की यह हरकत अस्वीकार्य है लेकिन वह समझ सकते हैं कि उन्हें यह करने के लिए मजबूर किया गया था।



फीफा ने इस हरकत के लिए ज़िदान पर तीन मैच का बैन और 7,500 स्विस फ्रैंक का जुर्माना लगाया जबकि मैटाराज्जी पर 2 मैच का बैन और 5,000 स्विस फ्रैंक का जुर्माना लगाया था। चूंकि ज़िदान फुटबॉल से रिटायर हो चुके थे इसलिए उन्होंने बैन की जगह 3 दिन की सामुदायिक सेवा की।

ज़िदान ने बाद में अपनी हरकत के लिए माफी तो मांग ली लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें उसका कोई पछतावा नहीं है।

Italian defender Fabio Cannavaro celebra

मैटाराज्जी ने इस घटना के 2 महीने बाद इसका विवरण कुछ इस तरह दिया, 'मैंने ज़िदान की शर्ट पकड़ी तो उसने मुझसे कहा कि अगर मुझे उसकी शर्ट चाहिए तो मैं मैच के बाद ले सकता हूं। जवाब में मैंने कहा कि इसकी जगह मैं तेरी वेश्या बहन को पसंद करूंगा।'

मैटाराज्जी ने दावा किया कि वह नहीं जानते थे कि ज़िदान की कोई बहन भी है। खैर, ज़िदान का हेडबट इटली के बजाय फ्रांस पर भारी पड़ा और पेनल्टी शूटआउट तक खिंचे इस मैच में इटली ने फ्रांस को 5-3 से हराकर वर्ल्ड कप जीत लिया।

French football captain Zinedine Zidane

इस तरह दुनिया के महानतम फुटबॉलर्स में से एक का करियर एक रेड कार्ड और भारी विवाद के साथ खत्म हुआ। हालांकि फ्रांस की जनता ने अपने नायक ज़िदान और अपनी टीम का जोरदार स्वागत किया और राजधानी पेरिस के क्रिलोन होटल पर बड़ी सी जर्सी टांग हजारों लोग अपने नायकों के अभिवादन के लिए मौजूद थे।

जिजोऊ, जिजोऊ चिल्ला रही इस भीड़ का नेतृत्व देश के राष्ट्रपति कर रहे थे। इस घटना को लेकर कराई गई वोटिंग में  61 फीसदी फ्रेंच लोगों ने कहा कि उन्होंने ज़िदान को माफ कर दिया है जबकि 52 फीसदी लोगों का कहना था कि वह ज़िदान की हालत समझ सकते हैं।

French football fans stand in front of t

अखबार ज़िदान की तारीफों से भरे थे। एक अखबार की हेडिंग थी, 'पूरे एक महीने तक फ्रांस ज़िदान के साथ सपने देख रहा था' तो वहीं दूसरे अखबार ने लिखा, 'हमारे लिए खुशी की बात है कि हमारा हीरो अविश्वसनीय है' 

French football team captain Zinedine Zi

अभी ज़िदान रियल मैड्रिड के मैनेजर हैं और 18 महीनों के कार्यकाल में यूरोपियन क्लब कंपटिशन की सबसे बड़ी ट्रॉफी चैंपियंस लीग को दो बार जीत चुके हैं जबकि मार्को मैटाराज्जी पिछले सीजन तक इंडियन सुपर लीग की टीम चेन्नैइन FC के मैनेजर थे जिसके साथ उन्होंने लीग का दूसरा सीजन जीता था।

द अदर फाइनलः दुनिया के सबसे खुशहाल देश में खेलीं दुनिया की दो सबसे घटिया टीमें

आज से ठीक 15 साल पहले आज ही के दिन एशिया (जापान-कोरिया) में पहली बार हुए वर्ल्ड कप का फाइनल खेला गया था। 30 जून 2002 को हुए इस फाइनल में ब्राजील ने रोनाल्डो के 2 गोल्स की मदद से जर्मनी को 2-0 से हराकर खिताब अपने नाम किया था।

Brazil's forward Ronaldo celebrates, wit

जापान के योकोहामा स्टेडियम में खेले गए इस मैच को देखने के लिए स्टेडियम में लगभग 70 हजार लोग जमा थे तो वहीं टीवी पर इस मैच को अरबों लोगों ने देखा। इस मैच में खेल रहे प्लेयर्स की चमक पूरी दुनिया में फैली थी। यहां तक कि यूपी के छोटे-छोटे जिले जिनका मन बस क्रिकेट में रमता है वह भी रोनाल्डो की अजीबोगरीब हेयरस्टाइल को कॉपी कर चिल्ला रहे थे, वाह कान वाह (ओलिवर कान जर्मन गोलकीपर)।

FUSSBALL: WM 2002 in JAPAN und KOREA, HALBFINALE GER - KOR

इस मैच/टूर्नामेंट और इसके बाद फुटबॉल में आए बदलावों की चर्चा आज भी होती है लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसी दिन एक और फाइनल खेला गया था। इस मैच के आयोजन स्थल से लगभग पांच हजार किलोमीटर दूर खेले गए इस मैच को देखने के लिए स्टेडियम में लगभग 25,000 लोग जमा थे।

'द अदर फाइनल' के नाम से खेला गया यह मैच दुनिया की दो सबसे 'घटिया' टीमों के बीच खेला गया था। दरअसल साल 2002 के इस वर्ल्ड कप के लिए नीदरलैंड्स की टीम क्वॉलिफाई नहीं कर पाई थी जिसके लिए उसे अपने देशवासियों के गुस्से का सामना करना पड़ा था।

FUSSBALL: LAENDERSPIEL 2002, GER - HOL 1:3

वर्ल्ड कप में अपनी टीम को चियर करने का मौका ना मिलने पर दो डच ऐड-एजेंसी पार्टनर्स जोहान क्रैमर और मैटिएस डे जोंग ने दुनिया की सबसे घटिया टीम खोजने की सोची। इसके पीछे उनका सोचना था कि अगर हमारी टीम (नीदरलैंड्स दुनिया की बेस्ट टीम्स में से एक है) दुनिया की सबसे घटिया टीम नहीं है तो आखिर वो कौन सी टीम है जिसे हम दुनिया की सबसे घटिया टीम कह सकते हैं।

दोनों ने उस वक्त की फीफा रैंकिंग में सबसे निचले नंबर पर मौजूद कैरिबियन आईलैंड मोंटसेरैट और नीचे से सेकेंड भूटान के बीच एक मैच कराने का फैसला किया। इस मैच से पहले भूटान अपने इतिहास में एक भी ऑफिशियल मैच नहीं जीता था जबकि मोंटसेरैट ने सिर्फ दो मैच जीते थे।

The Other Final

मैच के लिए फीफा की अनुमति ली गई और फीफा ने इसे ऑफिशियल फ्रेंडली करार दे दिया। दिन तय किया गया 30 जून और जगह भूटान की राजधानी थिम्पू का चांग्लिमिथांग स्टेडियम। सब तय तो हो गया लेकिन इन दोनों देशों के बीच मैच आयोजित कराना इतना आसान तो नहीं था।
जहां मोंटसेरैट को ज्लावामुखी भड़कने से काफी नुकसान पहुंचा था और हजारों लोगों को द्वीप छोड़ना पड़ा था वहीं भूटान की टीम के पास ना तो मैनेजर था और ना ही प्रॉपर टीम। यहां तक कि मोंटसेरैट द्वीप का इकलौता फुटबॉल स्टेडियम भी इस ज्वालामुखी के गुस्से की भेंट चढ़ गया था।

इनके प्रस्ताव का पहले तो दोनों देशों ने मजाक उड़ाया क्योंकि आमतौर पर इंटरनेशन टीम्स के बीच के मैच ऑर्गनाइज करने के लिए दो देशों की फे़डरेशन प्रयास करती हैं ना कि कोई व्यक्ति। शुरुआत में दोनों ही देशों को लगा कि यह आइडिया रियलिस्टिक नहीं है, दोनों ही देशों के ऑफिशियल्स को लगा कि उनका मजाक बनाया जा रहा है।

Team Bhutan

और करते भी क्या, यह बेचारे एक दूसरे की फुटबॉल टीम्स तो छोड़िए एक दूसरे को बतौर देश भी सिर्फ नाम से जानते थे। हालांकि मोंटसेरैट काफी आसानी से भूटान तक आने और मैच खेलने के लिए रेडी हो गया। दरअसल वहां की सरकार को यह मैच ज्वालामुखी भड़कने के बाद चर्चा में आए अपने देश की नेगेटिव खबरों को काउंटर करने का अच्छा जरिया लगा।

मैच से तीन हफ्ते पहले डच कोच एरी स्कैंस भागकर भूटान पहुंचे और उन्होंने होम साइड की कमान संभाली। उन्होंने टीम के साथ 4 घंटे डेली का ट्रेनिंग शेड्यूल फिक्स किया और उन्हें मैच के लिए तैयार करना शुरू किया। मैच से पहले दोनों की टीम्स जीत को लेकर आश्वस्त थीं।

पताु

जहां भूटान के स्ट्राइकर दिनेश छेत्री ने मैच से पहले कहा कि उनकी टीम 2-0 से जीतेगी वहीं मोंटसेरैट के मिडफील्डर एंटोइने लेक विलिक्स ने दावा किया था कि वह 3-0 से जीतेंगे।

4000 से भी कम आबादी वाले मोंटसेरैट और लगभग 6 लाख की आबादी वाले दुनिया के सबसे खुशहाल देश के बीच हुआ यह मैच 4-0 से भूटान के नाम रहा।

िपरप

इस तरह से भूटान ने अपनी पहली इंटरनेशनल जीत दर्ज की। इस जीत में वांगे दोर्जी ने हैटट्रिक जमाई जबकि दिनेश छेत्री ने एक गोल किया। इतना ही नहीं यह भूटान के इतिहास का पहला मैच था जिसमें उन्होंने एक भी गोल नहीं खाया था।

इस तरह आज से 15 साल पहले एक ही समय और एक ही कॉन्टिनेंट में जहां ब्राजील 5 वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बनी वहीं भूटान ने अपने इतिहास की पहली जीत दर्ज की।

मैच की सारी तस्वीरें ​kesselskramer से साभार