Sunday, 30 September 2018

म्यूनिख हादसे के 60 सालः 'शायद यह मौत हो, लेकिन मैं तैयार हूं'

अप्रैल 1955 में यूनियन ऑफ यूरोपियन फुटबॉल असोसिएशन (UEFA) ने UEFA से जुड़े देशों की फुटबॉल लीग के चैंपियन क्लब्स के लिए यूरोपियन कप के नाम से एक फुटबॉल कम्पटिशन शुरू कराया।

1955-56 सीजन से शुरू हुए इस कम्पटिशन में इंग्लिश क्लबों का भाग लेना इंग्लिश लीग फुटबॉल को चलाने वाली संस्था 'द फुटबॉल लीग' को पसंद नहीं आया और लीग के सेक्रेटरी एलन हार्डेकर ने उस सीजन के इंग्लिश लीग विनर्स चेल्सी को इस कम्पटिशन में खेलने की अनुमति नहीं दी।

Manchester United v Crystal Palace - Premier League

अगले सीजन यानि कि 1956-57 में इंग्लिश लीग का खिताब मैनचेस्टर यूनाइटेड ने जीता। क्लब के उस वक्त के मैनेजर सर मैट बस्बी ने क्लब के चेयरमैन हैरॉल्ड हार्डमैन और इंग्लैंड में फुटबॉल की गवर्निंग बॉडी 'द फुटबॉल असोसिएशन' के सेक्रेटरी स्टैनली रोज के साथ मिलकर काफी प्रयास कर 'द फुटबॉल लीग' को मना लिया और मैनचेस्टर यूनाइटेड यूरोपियन कप में खेलने वाला पहला इंग्लिश क्लब बना।

इस सीजन के सेमीफाइनल में रियल मैड्रिड से हारने के बाद मैनचेस्टर यूनाइटेड ने अगले सीजन फिर से इंग्लिश लीग का खिताब जीतकर 1957-58 सीजन के यूरोपियन कप में जगह बनाई। इंग्लिश लीग के मैच जहां वीकेंड पर होते थे वहीं यूरोपियन कप के मैच मिडवीक में खेले जाते थे और अगर यूनाइटेड को दोनों कम्पिटशन में खेलना था तो उसे उस दौर में बेहद रिस्की मानी जाने वाली हवाई यात्राएं करनी ही थीं।

A giant mural depicting the 1958 Manches

खैर, टीम यूरोपियन कप में उतरी और प्रिमिलनरी राउंड में शैमरॉक रोवर्स और फर्स्ट राउंड में डुकला प्राग को हराने के बाद टीम को क्वॉर्टरफाइनल में यूगोस्लाविया की रेड स्टार बेलेग्राद के खिलाफ खेलना था।

14 जनवरी 1958 को 'Busby's Babes' के नाम से मशहूर यंग और अकैडमी प्लेयर्स से बनी मैनचेस्टर यूनाइटेड की टीम ने ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए यूरोपियन कप के क्वॉर्टर फाइनल के पहले लेग में रेड स्टार बेलेग्राद की टीम को 2-1 से हराया।

टीम को 5 फरवरी को होने वाले रिटर्न लेग के लिए यूगोस्लाविया जाना था। पिछले राउंड में प्राग से लौटते वक्त इंग्लैड के ऊपर छाई धुंध के चलते टीम मैनचेस्टर तक उड़कर नहीं आ पाई थी और उसे प्राग से एम्सटर्डम और फिर हूक ऑफ हॉलैंड से फेरी द्वारा हार्विच और फिर वहां से ट्रेन द्वारा मैनचेस्टर आना पड़ा था।

Barcelona v Manchester United - UEFA Champions League Final

इस लंबी यात्रा ने प्लेयर्स को बुरी तरह थका दिया और उन्हें डोमेस्टिक लीग में बर्मिंघम सिटी के खिलाफ 3-3 से ड्रॉ खेलना पड़ा। फुटबॉल लीग फिक्सचर मिस ना हों और प्लेयर्स को ऐसी असुविधा का सामना ना करना पड़े इसके लिए क्लब ने ब्रिटिश यूरोपियन एयरवेज का एक प्लेन चार्टर्ड किया।

5 फरवरी 1958 को टीम ने रेड स्टार के घर में मैच का दूसरा लेग खेला जो कि 3-3 से बराबरी पर छूटा और टोटल 5-4 से स्कोर से यह मैच जीत 'बस्बी के बच्चे' यूरोपियन कप के सेमीफाइनल में जगह बनाने की खुशी में डूब गए। 6 फरवरी 1958 को बेलेग्राद से उड़ान भरने वक्त टीम के राइट विंगर जॉनी बेरी का पासपोर्ट गुम होने के चलते प्लेन 1 घंटे की देरी से उड़ा।

प्लेन बेलेग्राद से उड़ा तो माहौल काफी खुशनुमा था। सारे प्लेयर्स और स्टाफ जहां अपनी जीत सेलिब्रेट करने में जुटे थे वहीं प्लेन में बैठे जर्नलिस्ट अपने-अपने अखबार के लिए स्टोरी/इंटरव्यू आईडिया पर विचार कर रहे थे। बेलेग्राद से उड़ी ब्रिटिश यूरोपियन एयरवेज की फ्लाइट नंबर 609 ने तात्कालीन वेस्ट जर्मनी के म्यूनिख में फ्यूल भरने के लिए स्टॉपेज लिया क्योंकि एलिजाबेथियन क्लास के एयरस्पीड अम्बेसडर विमान में बेलेग्राद से मैनचेस्टर तक नॉनस्टॉप उड़ने भर के ईंधन की कैपसिटी नहीं थी।

Manchester United v Manchester City - Premier League

प्लेन में कुल 44 लोग थे जिनमें स्क्वॉड, मैनेजर और बाकी स्टाफ के साथ ही कुछ जर्नलिस्ट्स भी मौजूद थे। जब प्लेन म्यूनिख में रुका तो मौसम काफी खराब था। जोरदार बर्फबारी के चलते रनवे का बुरा हाल था। प्लेन के पायलट्स कैप्टन जेम्स थैन और केनेथ रेमेंट ने टेक ऑफ की दो असफल कोशिशें कीं। विमान के बाएं इंजन में थोड़ी दिक्कत थी लेकिन अपने शेड्यूल से बहुत पीछे छूट जाने के डर से कैप्टन थैन टेक ऑफ के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे थे।

कुछ लोगों ने रात म्यूनिख में बिताने को कहा जिससे सुबह मौसम थोड़ा सही हो तब आराम से निकला जाए। लेकिन कैप्टन थैन ने यह आइडिया रिजेक्ट कर दिया क्यों फ्लाइट वैसे भी शेड्यूल से लेट हो रही थी। प्लेयर्स का जाने का जरा भी मन नहीं था और भीषण बर्फबारी के चलते जब टेक-ऑफ का दूसरा प्रयास भी विफल रहा तो प्लेयर्स को विमान से उतारकर एयरपोर्ट लॉन्ज में भेज दिया गया।

Manchester United Marks 50th Anniversary Of Munich Air Disaster

वहीं से यूनाइटेड के प्लेयर डंकन एडवर्ड्स ने मैनचेस्टर में अपनी मकान मालकिन को टेलिग्राम किया, 'सारी फ्लाइट्स कैंसल, कल उड़ान भरेंगे, डंकन'। कैप्टन थैन ने स्टेशन इंजीनियर बिल ब्लैक को इंजन की समस्या के बारे में बताया। ब्लैक ने जांच के बाद थैन से कहा कि समस्या दूर करने के लिए विमान को रात भर के लिए वहीं रोकना होगा।

कैप्टन थैन ने इंजीनियर की सलाह के बावजूद म्यूनिख के 2 किलोमीटर लंबे रनवे पर भरोसा करते हुए टेक-ऑफ के तीसरे प्रयास की तैयारी शुरू कर दी। रनवे का हाल बुरा था और भयानक बर्फबारी के चलते जहां रनवे खत्म हो रहा था उस एरिया में कीचड़ की एक मोटी परत जम गई थी लेकिन सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान एयरफोर्स में काम कर चुके दोनों पायलट्स को खुद पर भरोसा था।

Manchester United v Manchester City - Premier League

प्लेयर्स को वापस बुलाया गया। टीम में कुछ ऐसे प्लेयर्स भी थे जिन्हें हवाई यात्रा का बेहद कम अनुभव था। ऐसे ही एक प्लेयर लियाम व्हेलन ने विमान में बैठते हुए कहा, 'शायद यह मौत हो, लेकिन मैं तैयार हूं।' टेकऑफ हुआ। विमान की स्पीड 217km/h पर पहंची। इस स्पीड पर पहुंचने के बाद टेक-ऑफ टाला नहीं जा सकता।

कैप्टन थैन ने कंट्रोल टॉवर को इत्तिला दी कि हम इस स्पीड पर हैं, लेकिन स्पीड अभी भी इतनी (220km/h) नहीं थी कि विमान टेक-ऑफ कर सके। थैन को उम्मीद थी कि स्पीड बढ़ेगी लेकिन एकाएक स्पीड कम होनी शुरू हो गई। 217km/h पर लड़खड़ाई स्पीड 207km/h और फिर 194km/h पर आई और रेमेंट के मुंह से निकला, 'क्राइस्ट, हमसे नहीं होगा।'

Manchester United v Manchester City - Premier League

उनके यह बोलने के साथ ही विमान कीचड़ पर फिसलते हुए किनारों पर लगी बाड़ को तोड़कर एक मकान से जा टकराया। इस टक्कर से विमान का बाया पंख टूटकर गिर गया। विमान का दायां हिस्सा एक लकड़ी के मकान से टकराया जिसमें तेल और टायर से भरा एक ट्रक खड़ा था जो टक्कर होते ही फट गया। 20 लोग तुरंत मर गए और 3 की बाद में अस्पताल में मौत हो गई।

टक्कर के बाद आग कॉकपिट के आसपास फैलने लगी और विमान में आग लगने की आशंका को देखकर कैप्टन थैन ने पहले अपने क्रू को भगाया और फिर जल्दी-जल्दी लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। टीम के गोलकीपर हैरी ग्रेग की हालत खराब थी, वह धीरे-धीरे होश खो रहे थे।

Manchester City Representatives Commemorate Manchester United Victims Of 1958 Air Disaster In Munich

उन्हें लगा कि वह मर गए हैं। अपने चेहरे पर खून महसूस होने के बावजूद वह अपने हाथ उठाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे। उन्हें लगा कि उनकी गर्दन से ऊपर का हिस्सा कटकर अलग हो चुका है। तभी उन्हें अपने ठीक ऊपर थोड़ी सी रौशनी दिखी और वह किसी तरह खुद को संभालकर विमान से बाहर निकले। बाद में उन्होंने टूटे एरिया में फंसे लोगों को निकालने में कैप्टन थैन की मदद की।

इस क्रैश में मरने वालों की लिस्ट कुछ इस तरह थी-
क्रू
कैप्टन केनेथ केन रेमेंट (तीन हफ्ते बाद ब्रेन डैमेज के चलते अस्पताल में मौत)
टॉम केबल (केबिन स्टीवार्ड)
प्लेयर्स
जिऑफ बेंट
रोजर बिर्ने
एडी कोलमैन
डंकन एडवर्ड्स (15 दिन बाद अस्पताल में मौत)
मार्क जोंस
डेविड पेग
टॉमी टेलर
लियाम 'बिली' व्हेलन
टीम स्टाफ
वाल्टर क्रिकमेर (क्लब सेक्रेटरी)
टॉम करी (ट्रेनर)
बर्ट व्हैली (चीफ कोच)
जर्नलिस्ट
अल्फ क्लार्क (मैनचेस्टर ईवनिंग क्रॉनिकल्स)
डैनी डेवीस (मैनचेस्टर गार्जियन)
जॉर्ज फॉलोव्स (डेली हेराल्ड)
टॉम जैकसन (मैनचेस्टर ईवनिंग न्यूज)
आर्ची लेडब्रूक (डेली मिरर)
हेनरी रोज (डेली एक्सप्रेस)
फ्रैंक स्विफ्ट (इंग्लैंड और मैनचेस्टर सिटी के पूर्व गोलकीपर और न्यूज ऑफ द वर्ल्ड के जर्नलिस्ट, अस्पताल ले जाते वक्त मौत)
एरिक थॉम्पसन (डेली मेल)
क्रैश में बचे लोग
क्रू
मार्गरेट बेलीस (स्टीवार्डेस)
रोजमेरी शेवर्टन (स्टीवार्डेस)
जॉर्ज रोजर्स (रेडियो ऑफिसर)
कैप्टन जेम्स थैन (पायलट, 1975 में मौत)
प्लेयर्स
जॉनी बेरी (फिर कभी नहीं खेल पाए)
जैकी ब्लैंकफ्लॉवर (फिर कभी नहीं खेल पाए)
सर बॉबी चार्लटन (मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले प्लेयर्स की लिस्ट में सेकंड)
बिल फॉक्स
हैरी ग्रेग
केनी मोर्गन्स
अल्बर्ट स्कैलॉन
डेनिस वॉइलेट
रे वुड
स्टाफ
सर मैट बस्बी (मैनेजर)
जर्नलिस्ट
टेड इलयार्ड (डेली मेल)
पीटर हॉवर्ड (डेली मेल, फोटोग्राफर)
फ्रैंक टेलर, (न्यूज क्रॉनिकल)

वेस्ट जर्मन एयरपोर्ट अथॉरिटी ने अपनी जांच में कैप्टन थैन को दोषी ठहराते हुए कहा कि उन्होंने उड़ान से पहले विमान के पंखों से बर्फ नहीं हटाई थी। हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों का मानना था कि दुर्घटना रनवे पर फैले कीचड़ के चलते हुई थी। घटना के 10 साल बाद साल 1968 में कैप्टन थैन को दोषमुक्त करार दिया गया।

इस हादसे के वक्त मैनचेस्टर यूनाइटेड अपना लगातार तीसरा इंग्लिश लीग खिताब जीतने की कोशिशों में था। हादसे के वक्त टीम 14 मैच बाकी रहते लीग टेबल में पहले नंबर की टीम वॉल्वरहैम्पटन वांडरर्स से 6 पॉइंट पीछे थी।

लगातार दूसरी बार यूरोपियन कप के सेमीफाइनल में पहुंची वह टीम पिछले 11 मैचों से अपराजेय थी। इस हादसे ने ना सिर्फ उन्हें लीग टेबल में नौवें नंबर पर धकेल दिया बल्कि वह सेमीफाइनल में मिलान (ओल्ड ट्रैफर्ड पर 2-1 से जीतने के बाद अवे लेग में 4-0 से हार मिली) से हारकर यूरोपियन कप से बाहर हुए और इंग्लिश फुटबॉल इतिहास की सबसे महान जेनरेशन एक साथ खत्म हो गई।

सर मैट बस्बी दो महीने से ज्यादा वक्त तक हॉस्पिटल में रहे और डॉक्टर्स को उनके बचने का बिल्कुल भी भरोसा नहीं था इसीलिए हॉस्पिटल में ही इस दौरान दो बार उनकी अंतिम रस्में भी निभा दी गईं। हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद सर मैट का मन फुटबॉल से उचट गया और वह सब छोड़ स्विटजरलैंड निकल गए।

वहां उनकी बीवी जीन ने उनसे कहा, 'तुम्हें पता है मैट, अगर वे लोग होते तो यही चाहते कि तुम कन्टिन्यू करो।' इस वाक्य ने उन्हें वापस आने पर मजबूर किया और फिर सर मैट बस्बी ने यूनाइटेड के साथ ही 'Busby's Babes' को भी दोबारा से खड़ा किया जिसमें ​जॉर्ज बेस्ट और डेनिस लॉ जैसे लेजेंड्स शामिल थे।

Europe

10 साल बाद सर मैट बस्बी ने मैनचेस्टर यूनाइटेड को यूरोपियन चैंपियन बनाया। 29 मई 1968 को हुए फाइनल में टीम ने फाइनल में पुर्तगाली चैंपियन बेनफिका को 4-1 से हराकर हराकर यूरोपियन कप जीतने वाली पहली इंग्लिश टीम बनने का गौरव हासिल किया। इस टीम में म्यूनिख हादसे से बचे बस दो प्लेयर, सर बॉबी चार्लटन और बिल फॉक्स शामिल थे।

कल के अखबार में देखा कि इंडियन क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने इस हादसे के बाद यूनाइटेड की वापसी की तुलना चेन्नई सुपरकिंग्स के स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी का प्रतिबंध काटने के बाद वापसी करने से की।


Guys please take the reporting with a pinch of salt with respect to the Munich tragedy and CSK. All I said was the break will make the ..

इंफॉर्मेशन टेक्नलॉजी में बी. टेक की डिग्री रखने वाले अश्विन से ऐसे बयान की उम्मीद किसी को नहीं थी। कहा जाता है कि अश्विन शुरू से ही पढ़ाई में बहुत तेज थे।


Fans turn up in numbers when the come back happens. Not required to blow it out of context.

माना जाता है कि पढ़ा-लिखा आदमी/ब्राइट स्टूडेंट तार्किक होता है लेकिन अश्विन ने अपने बयान पर माफी मांगने की जगह अपनी आलोचना करने वालों को बाद में आने को कहा।


Now all those who hate me, please get off my mentions, we will catch-up sometime later when I get misquoted again. Thanks🙏

​​अश्विन ने ट्वीट किया, 'अब जिन्हें मुझसे नफरत है, मुझे मेंशन ना करें, हम फिर मिलेंगे जब दोबारा मेरे किसी बयान का गलत अर्थ निकाला जाएगा।'

अश्विन की सफाई के हिसाब से वह कहना चाह रहे थे कि ब्रेक से वापसी करने वाली टीम्स का फैंस जोरदार स्वागत करते हैं। माराडोना को अपना फेवरेट फुटबॉलर और स्पैनिश नेशनल टीम को अपनी फेवरेट फुटबॉल टीम बताने वाले अश्विन शायद भूल गए कि यूनाइटेड ने कभी ब्रेक लिया ही नहीं था।

हादसे के तुरंत बाद उन्होंने शेफील्ड वेडनसडे को 3-0 से हराया था और लीग और यूरोपियन कप के बचे हुए मुकाबले भी खेले थे। उनकी तुलना करने जैसा कुछ नहीं था लेकिन कर ही दी तो माफी मांगने में कुछ चला नहीं जाता।

खैर, जब इंसानों को खुदा बनाया जाता है तो बनाने वालों की कदर कीड़े-मकोड़ों जैसी ही होती है। शुक्रिया अश्विन, अपना और हमारा दोनों का लेवल बताने के लिए।

'तेरी शर्ट की जगह मैं तेरी वेश्या बहन को पसंद करूंगा' के बाद वह रुका, पलटा और धड़ाम

25 जून 2004, पुर्तगाल में चल रहे यूरो कप के क्वॉर्टर फाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन फ्रांस के सामने ग्रीस की टीम थी। एक से बढ़कर एक दिग्गजों से भरी फ्रेंच टीम के सामने ग्रीस की टीम वैसे ही खड़ी थी जैसे 1983 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में कपिल देव की अगुवाई वाली टीम इंडिया।

किसी को उम्मीद नहीं थी कि ग्रीस, फ्रांस को टक्कर दे पाएगी। तमाम फुटबॉल पंडित, जर्नलिस्ट, फैंस सब फ्रांस के अगले मैच की तैयारी में लगे थे, क्योंकि इस मैच में तो बस फ्रेंच टीम को 90 मिनट प्रैक्टिस करनी थी ना। वैसे अगर उस दौर में मैं फुटबॉल देखता तो मैं भी फ्रांस के पाले में ही खड़ा होता।

French midfielder Zinedine Zidane (3rd R

फ्रेंच टीम थी ही ऐसी- गोलकीपर फैबिएन बार्थेज, डिफेंस में लिलियन थुर्रम, माइकल सिल्वेस्टर और विलियम गलास जैसे दिग्गज। मिडफील्ड में पिछले यूरो के बेस्ट प्लेयर चुने गए और फुटबॉल की दुनिया के बेस्ट अटैकिंग मिडफील्डर्स में से एक ज़िनेदिन ज़िदान, फुटबॉल की हिस्ट्री के बेस्ट होल्डिंग मिडफील्डर्स में से एक क्लाउल माकेलेले, रॉबर्ट पाइरेस, अटैक में आर्सनल लेजेंड थिएरी ऑनरी, युवेंटस के दिग्गज डेविड ट्रेजेगुएट और यूनाइटेड लेजेंड लुईस साहा वाली टीम को कोई भी फुटबॉल फैन सपोर्ट कर देगा।

Fussball: EM 2004 in Portugal, FRA-GRE

पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में यह मैच शुरू तो हुआ फ्रांस के शोर के साथ लेकिन मिनट दर मिनट हवा ग्रीस की तरफ होती गई। अनजान प्लेयर्स वाली ग्रीस ने कमाल का खेल दिखाते हुए फ्रेंच टीम को बांधकर रख दिया था। दुनिया की बेस्ट अटैकिंग टीम्स में से एक फ्रांस के अटैकर्स ना तो मूव बना पा रहे थे और ना ही ग्रीस के डिफेंस पर कोई प्रेशर।

मैच पर ग्रीस की दमदार पकड़ से फ्रांस की झुंझलाहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे मैच में उन्होंने टार्गेट पर 4 जबकि टार्गेट के बाहर 6 शॉट्स मारे। ग्रीस ने इस मैच में कुल 5 शॉट लिए और पांचों ही गोल पर रहे।

Euro 2004: France v Greece

मैच के 65वें मिनट में एंजेलोस चैरिस्टीज ने मैच का इकलौता गोल कर ग्रीस को फ्रांस पर इतिहास की पहली जीत दिलाई। इस हार के साथ ही डिफेंडिंग चैंपियन फ्रांस यूरो 2004 से बाहर हो गया और इस हार से बेजार ज़िदान ने इंटरनेशनल फुटबॉल को अलविदा कह दिया।

अगस्त 2005, साल 2006 के वर्ल्ड कप के क्वॉलिफायर्स मुकाबले चल रहे थे। फ्रांस की टीम अपने कई मुख्य खिलाड़ियों जैसे, माकेलेले, डेजाइली, थुर्रम की 'मास रिटायरमेंट' के बाद वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई करने में नाकाम होती दिख रही थी। उस वक्त के टीम के कोच हैरान-परेशान थे कि टीम क्वॉलिफाई ना कर पाई तो क्या होगा।

Fussball: EM 2004 in Portugal, FRA-GRE

थक-हारकर उन्होंने 34 साल के ज़िदान से वापस आने की रिक्वेस्ट की। टीम को परेशान देख ज़िदान ने वापसी की बात मान ली और कोच रेमंड डोमेनेच ने उन्हें कैप्टन बना दिया। ज़िदान ने वापसी के बाद फ्रांस की गोल्डेन जेनरेशन के दो अन्य महत्वपूर्ण सदस्य, माकेलेले और थुर्रम को वापसी के लिए मनाया। इनकी वापसी के बाद टीम ने अपना प्रदर्शन सुधारकर 2006 के वर्ल्ड कप के लिए क्वॉलिफाई किया।

नॉकआउट राउंड्स में स्पेन, ब्राजील और पुर्तगाल को हराकर फाइनल में पहुंची। लास्ट ग्रुप मैच से सस्पेंड रहने वाले ज़िदान ने राउंड ऑफ-16 में स्पेन के खिलाफ एक असिस्ट और एक गोल के साथ वापसी की और अपनी टीम का क्वॉर्टरफाइनल में पहुंचना सुनिश्चित किया।

French midfielder Zinedine Zidane (front

क्वॉर्टरफाइनल में फ्रांस ने जबरदस्त खेल दिखाते हुए डिफेंडिंग ब्राजील को गोल पर महज एक शॉट पर रोक दिया। ज़िदान ने थिएरी हेनरी के गोल को असिस्ट कर फ्रांस को 1-0 की जीत दिलाई और मैन ऑफ द मैच बने। सेमीफाइनल में ज़िदान ने पेनल्टी पर गोल दागकर अपनी टीम को पुर्तगाल पर जीत दिलाकर फाइनल में पहुंचा दिया।

उस वर्ल्ड कप में ज़िदान की फॉर्म का यह हाल था कि फाइनल से पहले ही फीफा ने उन्हें टूर्नामेंट का बेस्ट प्लेयर चुन लिया। जिदान को इसके लिए गोल्डन बॉल मिली। ज़िदान ने पहले ही बता दिया था कि इस वर्ल्ड कप के बाद वह फुटबॉल से रिटायरमेंट ले लेंगे। फ्रांस के फाइनल में पहुंचने के बाद इटली को छोड़कर पूरी दुनिया जिजोऊ के नाम से फेमस ज़िदान को वर्ल्ड कप जीतते हुए देखना चाहती थी।

French midfielder Zinedine Zidane (C) wa

9 जुलाई 2006 को बर्लिन में खेले गए इस मैच की शुरुआत बेहतरीन हुई और ज़िदान ने 7वें मिनट में मार्को मैटराज्जी के फाउल पर मिली पेनल्टी को गोल में बदल अपनी टीम को लीड दिलाई। इस गोल के साथ ही ज़िदान दो वर्ल्ड कप फाइनल्स में गोल करने वाले सिर्फ चौथे प्लेयर बन गए।

मैटराज्जी ने अपनी गलती को 19वें मिनट में सुधारा और आंद्रे पिर्लो के कॉर्नर पर गोल कर स्कोर 1-1 किया। फुलटाइम और एक्स्ट्रा टाइम में भी स्कोर 1-1 ही रहा और इटैलियन गोलकीपर जानलुइजी बुफों ने इस दौरान ज़िदान के एक हेडर पर शानदार सेव कर अपनी टीम को बचाया।

मैच के एक्स्ट्रा टाइम में इस वर्ल्ड कप का हीरो एक झटके में विलेन बन गया। मैच का 110वां मिनट चल रहा था, दोनों टीमें 1-1 गोल की बराबरी पर थीं। इसी दौरान लोगों ने देखा की इटैलियन डिफेंडर मैटाराज्जी ने ज़िदान से कुछ कहा, दोनों के बीच थोड़ी बातचीत हुई और ज़िदान दौड़ते हुए आगे बढ़ गए।

Argentine referee Horacio Elizondo shows


मैटाराज्जी फिर भी नहीं रुके और लगातार कुछ बोलते रहे। वो बोलते हुए चल रहे थे कि तभी दौड़ते हुए ज़िदान रुके, पलटे और अपना सर मैटाराज्जी की छाती पर दे मारा। मैटाराज्जी जमीन पर गिर पड़े और रेफरी का ध्यान दूसरी तरफ होने के नाते उसे पता ही नहीं चला कि हुआ क्या।

फोर्थ ऑफिशियल ने रेफरी को इस 'हेडबट' के बारे में बताया जिसके बाद रेफरी होरासियो इलिजोंडो ने टूर्नामेंट के बेस्ट प्लेयर को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया। यह ज़िदान के करियर का कुल 14वां और वर्ल्ड कप का दूसरा रेड कार्ड था। ज़िदान वर्ल्ड कप की हिस्ट्री में फाइनल मैच में रेड कार्ड पाने वाले कुल चौथे प्लेयर भी थे।

ज़िदान ने यह हरकत क्यों की इस पर कई तरह की बातें हुईं, अखबारों का दावा था कि मैटाराज्जी ने ज़िदान को मां-बहन की गालियां दी। मैटाराज्जी ने इस घटना से उबरने के बाद दावा किया कि उन्होंने ज़िदान से बदतमीजी जरूर की थी लेकिन मां की गालियां नहीं दी।

मैटाराज्जी ने ऐसा दावा करने वाले तीन ब्रिटिश अखबारों द टाइम्स, द सन और डेली स्टार पर केस भी किया था जिसका फैसला उनके पक्ष में रहा।

A photo taken 09 July 2006 shows French

ज़िदान ने इस घटना पर माफी मांगने से इनकार कर दिया और देश के राष्ट्रपति जैक्स चिराक ने ज़िदान को 'Man Of Heart and Conviction' करार दिया। चिराक ने कहा कि उन्हें पता है कि जिजोऊ की यह हरकत अस्वीकार्य है लेकिन वह समझ सकते हैं कि उन्हें यह करने के लिए मजबूर किया गया था।



फीफा ने इस हरकत के लिए ज़िदान पर तीन मैच का बैन और 7,500 स्विस फ्रैंक का जुर्माना लगाया जबकि मैटाराज्जी पर 2 मैच का बैन और 5,000 स्विस फ्रैंक का जुर्माना लगाया था। चूंकि ज़िदान फुटबॉल से रिटायर हो चुके थे इसलिए उन्होंने बैन की जगह 3 दिन की सामुदायिक सेवा की।

ज़िदान ने बाद में अपनी हरकत के लिए माफी तो मांग ली लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें उसका कोई पछतावा नहीं है।

Italian defender Fabio Cannavaro celebra

मैटाराज्जी ने इस घटना के 2 महीने बाद इसका विवरण कुछ इस तरह दिया, 'मैंने ज़िदान की शर्ट पकड़ी तो उसने मुझसे कहा कि अगर मुझे उसकी शर्ट चाहिए तो मैं मैच के बाद ले सकता हूं। जवाब में मैंने कहा कि इसकी जगह मैं तेरी वेश्या बहन को पसंद करूंगा।'

मैटाराज्जी ने दावा किया कि वह नहीं जानते थे कि ज़िदान की कोई बहन भी है। खैर, ज़िदान का हेडबट इटली के बजाय फ्रांस पर भारी पड़ा और पेनल्टी शूटआउट तक खिंचे इस मैच में इटली ने फ्रांस को 5-3 से हराकर वर्ल्ड कप जीत लिया।

French football captain Zinedine Zidane

इस तरह दुनिया के महानतम फुटबॉलर्स में से एक का करियर एक रेड कार्ड और भारी विवाद के साथ खत्म हुआ। हालांकि फ्रांस की जनता ने अपने नायक ज़िदान और अपनी टीम का जोरदार स्वागत किया और राजधानी पेरिस के क्रिलोन होटल पर बड़ी सी जर्सी टांग हजारों लोग अपने नायकों के अभिवादन के लिए मौजूद थे।

जिजोऊ, जिजोऊ चिल्ला रही इस भीड़ का नेतृत्व देश के राष्ट्रपति कर रहे थे। इस घटना को लेकर कराई गई वोटिंग में  61 फीसदी फ्रेंच लोगों ने कहा कि उन्होंने ज़िदान को माफ कर दिया है जबकि 52 फीसदी लोगों का कहना था कि वह ज़िदान की हालत समझ सकते हैं।

French football fans stand in front of t

अखबार ज़िदान की तारीफों से भरे थे। एक अखबार की हेडिंग थी, 'पूरे एक महीने तक फ्रांस ज़िदान के साथ सपने देख रहा था' तो वहीं दूसरे अखबार ने लिखा, 'हमारे लिए खुशी की बात है कि हमारा हीरो अविश्वसनीय है' 

French football team captain Zinedine Zi

अभी ज़िदान रियल मैड्रिड के मैनेजर हैं और 18 महीनों के कार्यकाल में यूरोपियन क्लब कंपटिशन की सबसे बड़ी ट्रॉफी चैंपियंस लीग को दो बार जीत चुके हैं जबकि मार्को मैटाराज्जी पिछले सीजन तक इंडियन सुपर लीग की टीम चेन्नैइन FC के मैनेजर थे जिसके साथ उन्होंने लीग का दूसरा सीजन जीता था।