Monday, 9 February 2015

"आप" को देखकर देखता रह गया...

जी हां जनता को कुछ यही लगा था जब आप राजनीति में आये थे। आपने वादे ही इतने बड़े-बड़े किये थे। वीआईपी कल्चर को खत्म करेंगे,बिजली,पानी मुफ्त(सस्ती) करेंगे, भ्रष्टाचार का अंत करेंगे। अंबानी-अदानी को जेल भेजेंगे और सच्चाई से परिपूर्ण आचरण करेंगे। बातें तो आपने और भी बहुत सी की थीं लेकिन आपका ज्यादा ध्यान भ्रष्टाचार को मिटाने पर था। या यूं कहें कि आपकी लड़ाई का आधार ही भ्रष्टाचार मिटाना था। आपकी सभाओं में नारे भी लगते थे "भ्रष्टाचार का एक ही काल, केजरीवाल,केजरीवाल" पहले आपने कांग्रेस को भ्रष्टाचारी घोषित किया,हमने यकीन भी कर लिया क्योंकि दशकों तक केंद्र में और 15 सालों से दिल्ली में कांग्रेस का ही राज था और घोटाले अपने चरम पर थे। कॉमनवेल्थ गेम्स,टूजी,कोल ब्लॉक, जैसे अनगिनत घोटालों का खुलासा हो रहा था। और आपकी अन्ना के साथ मिलकर शुरू की गई मुहिम के चलते पूरा देश करप्शन के खिलाफ अभूतपूर्व गुस्से में था जिसको भुनाने के लिये आपने अपना राजनैतिक दल बना लिया जिसका नाम आपने रखा "आम आदमी पार्टी" । आपके काम और पार्टी के नाम को देखकर बड़ी उम्मीदें जगीं। दबे कुचले लोगों को लगा कि अब उनके दिन बहुरने वाले हैं क्योंकि उनके हित की राजनीति करने वाला आ गया है। और भ्रष्टाचारियों को उनके दिन पूरे होते दिखे। दिल्ली में चुनाव हुये और जनता ने आपको 28 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में चुना। आपने कहा कि हम विपक्ष में बैठेंगे क्योंकि हमारे पास सरकार बनाने के लिये आवश्यक संख्याबल नहीं है। और उससे पहले ही आपने अपने बच्चों की कसम खाई थी कि ना तो किसी से समर्थन लेंगे और ना ही किसी को समर्थन देंगे। लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियां बदलीं और आपने पता नहीं किस जनता से पूछकर(क्योंकि जनता की राय का खुलासा आपने नहीं किया था) कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली। जी हां उस कांग्रेस के समर्थन से जिसे आप सबसे बड़ी भ्रष्टाचारी पार्टी मानते थे। चुनावों के दौरान आप बार बार तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ 370 पेज का सबूत लहरा कर सरकार बनते ही उनपर मुकदमा ठोंकने की बात करते थे। फिर आपने उन्हीं शीला जी की पार्टी के समर्थन से सरकार बनाई और सारे सबूत लुप्त हो गये। आपने कहा था कि सत्ता में आते ही बिजली कंपनियों का ऑडिट कराकर भ्रष्टाचारियों को जेल भेजेंगे। आपने सत्ता में आने के बाद ऑडिट का ऑर्डर तो दिया लेकिन आपके 49 दिवसीय कार्यकाल में वो ऑडिट पूरा नहीं हुआ। सत्ता में आने से पहले आप भ्रष्टाचारियों को जेल भेज रहे थे सत्ता में आने के बाद आपने कहा कि जो आपसे रिश्वत मांगे उसका स्टिंग करके हमारे पास लाओ तब हम कार्यवाही करेंगे। अब आपको कौन समझाये कि जनता को स्टिंग करने की ट्रेनिंग नहीं मिली है। अगर कुछ गड़बड़ हो जाये तो बेचारी जनता को भ्रष्टाचारी जान से भी मार डालेंगे क्योंकि अगर वो सरकारी ऑफिसर की जान ले सकते हैं तो जनता का तो वैसे भी कोई माई-बाप नहीं होता। आपने बिजली पानी के दाम कम किये ये सराहनीय कदम था लेकिन मान्यवर ये स्लैब बनाकर दाम कम करने की बात तो आपने नहीं की थी। 666 लीटर पानी मुफ्त और उसके बाद का पानी पहले के रेट से भी ज्यादा रेट पर। बिजली के शुरूआती 200 यूनिट सस्ते, 200-400 उससे महंगे और फिर और महंगे। अब आप ही बताओं कि 4 लोगों का परिवार 200 यूनिट बिजली और 666 लीटर पानी में कैसे गुजारा कर सकता है ? और दिल्ली के लगभग 50 % इलाकों में अगर पानी की लाइन ही नहीं है तो उन्हें इस योजना से क्या लाभ हुआ? जबकि इस योजना की सबसे ज्यादा जरूरत उन्हें ही है। साहब आपने जीतने से पहले कहा था कि आप और आपके साथी बंगला-गाड़ी नहीं लेंगे। जीतते ही आपने गाड़ियां भी लीं और वीआईपी नंबर भी। आपके बंगले की कहानी तो सभी को पता है। इस्तीफे के बाद भी आपने बंगला नहीं खाली किया और लगभग  2.58 लाख रुपये हर महीने किराया चुकाया, आप खुदको आम आदमी कहते हैं अच्छी बात है। लेकिन श्रीमान, क्या इस देश का आम आदमी इतने रुपये सिर्फ रहने पर खर्च कर सकने की हालत में हैं ? जी नहीं बल्कि इतने पैसों में एक आम आदमी अपनी बेटी की शादी निपटा देता है। आपने कहा था कि सत्ता में आते ही हम रोज लोगों की समस्याएं खुद सुनेंगे। आपने कोशिश भी की लेकिन अपनी आदत से मजबूर आप भागकर सचिवालय की छत पर पंहुच गये। आपके मंत्री सोमनाथ भारती जी जो कि वकालत करने के साथ ही पोर्न साइट्स भी चलाते हैं। आधी रात को शहंशाह बनकर रेड मारने निकल लिये और महिलाओं को सबके सामने पेशाब करने के लिये मजबूर किया, एम्स तक पीछा करके उनका यूरीन टेस्ट कराया। श्रीमान ये कैसा स्वराज है ? मुख्यमंत्री रहते हुये आप धरने पर बैठ गये वो भी तब जबकि गणतंत्र दिवस नजदीक था। आपके हिसाब से देश के गणतंत्र दिवस से ज्यादा जरूरी आपका धरना था जिसके लिये आपने  महिला सुरक्षा को मुद्दा बनाया था। आपको पता है अरविंद जी कि आपके इस धरने को पाकिस्तान के न्यूज चैनेल कैसे दिखा रहे थे ? वहां लोगों का कहना था कि जो काम हम इतने सालों में नहीं कर पाये वो अरविंद ने आते ही कर दिया। भारत मे अराजकता का माहौल बना दिया। गणतंत्र दिवस खतरे में आ गया था। लेकिन कुछ भी हो आपका मीडिया मैनेजमेंट जबरदस्त है। धरने में कब आप सड़क पर एक रजाई में सो रहे हैं और उसका कौन सा फ्रेम सही रहेगा उसका बेहद शानदार तरीके से ख्याल रखा था मीडिया ने। जब आपने मंच से खुद को अराजक कहा तो आपको क्या लगता है कि आप हीरो बन गये ? नहीं अरविंद आप हीरो नहीं नक्सली बन गये क्योंकि आप और वो दोनों संविधान का अपमान करना अपना हक समझते हैं। बस फर्क इतना है कि वो कम पढ़े लिखे हैं और हथियारों के दम पर संविधान का मखौल उड़ाते हैं और आप इंजीनियर और आईआरएस रह चुके हैं तो बोलकर। जब मुख्यमंत्री के तौर पर आप झंडारोहण करते हैं तो उसे सलामी नहीं देते और जब आपको गणतंत्र दिवस के लिये आमंत्रित नहीं किया जाता तो आपको बुरा लगता है। जब आपको लगा कि आपने जो वादे किये थे वो पूरे नहीं कर पायेंगे तो आपने जनलोकपाल बिल का बहाना बनाकर इस्तीफा दे दिया। जनलोकपाल बिल पारित कराने में इतनी जल्दबाजी किस बात की ? जनलोकपाल से ना तो लोगों को खाना मिलेगा ना घर और ना ही सस्ती बिजली,पानी। फिर उसके लिये दिल्ली वासियों के सपनों से मजाक क्यों ? सिर्फ इसलिये कि आपको मुगालता हो गया था कि आप पीएम बन सकते हैं ? बस दिया इस्तीफा और निकल पड़े वाराणसी वाया ट्रेन जेब में 500 रुपये लिये। जमकर प्रचार किया लगभग पौने 4 लाख वोटों से हारे और फिर विमान से वापस आये जबकि आपके चमत्कारिक 500 रुपये फिर भी बचे रह गये। आपकी लड़ाई भ्रष्टाचार से थी लेकिन ये लड़ाई कम से कम मेरी समझ में तो नहीं आई। सिर्फ खुलासे कर के आप क्या साबित करना चाहते हैं ? और ये जो आप ईमानदारी के प्रमाणपत्र बांटते हैं उसे पाने का क्या तरीका है? आम आदमी पार्टी की सदस्यता के साथ फ्री मिलता है ? आपके हिसाब से तो इस ब्रह्मांड में एक आप ही ईमानदार हैं बाकी सब चोर हैं,भ्रष्ट हैं। आप चाहे जो कहें लेकिन सच तो ये है कि, अरविंद जी आप सिर्फ नकारात्मक राजनीति करते हैं और कुछ नहीं।


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